What is Computer in Hindi

Computer kya hai
Computer kya hai

Computer क्या है (What is Computer In Hindi)

“Computer एक मशीन है”

जी हाँ, हमारे आसपास मौजूद अलग-अलग मशीनों की तरह ही कंप्यूटर भी एक मशीन है।

“कंप्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो User द्वारा दिए गए Input (Data) को Software तथा Hardware की सहायता से Process करता है और User को Output देने के साथ-साथ Output को Store भी करता है।”

Computer शब्द अंग्रेज़ी भाषा के Compute से बना है, जिसका अर्थ होता है गणना करना

कंप्यूटर के कितने भाग होते हैं

जिस तरह हमारा पूरा शरीर अलग-अलग अंगों से मिलकर बना होता है, ठीक उसी तरह कंप्यूटर भी उपकरणों का एक समूह होता है। जब सभी उपकरणों को एक साथ जोड़ा जाता है तो, कंप्यूटर बनता है।

Computer Structure parts

कंप्यूटर के तीन भाग होते हैं।

  • Input Unit
  • Central Processing Unit
  • Output Unit

Input Unit

कंप्यूटर की इस इकाई में वे सभी उपकरण(Input Devices) आते हैं, जिनकी सहायता से हम(User) कंप्यूटर को किसी भी तरह की Command देते हैं।

Keyboard और Mouse सबसे प्रमुख Input Devices हैं, जिनकी सहायता से हम कंप्यूटर को किसी भी कार्य को करने के लिए Command देते हैं।

Central Processing Unit

इसे Processor या Micro Processor भी कहा जाता है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप होती है। जिस तरह हमारा दिमाग़ हमारे पूरे शरीर की Functioning को Control करता है, उसी तरह CPU भी Computer System द्वारा किए जाने वाले सभी कार्यों को Control करता है। आसान भाषा में कहें तो Processor Computer System का दिमाग़ होता है।

किसी भी प्रोसेसर द्वारा कार्य करने की गति को Clock Speed कहा जाता है। Clock Speed को मापने के लिए GHz Unit का Use होता है।

आइए, Clock Speed के खेल को अच्छे से समझते हैं।

मान लीजिए किसी प्रोसेसर की स्पीड 1GHz है। यहां गीगा(G) का अर्थ है बिलियन(Billion) तथा हर्ट्ज(Hz) का अर्थ है चक्र(Cycle).

अतः 1GHz का अर्थ हुआ – एक बिलियन चक्र प्रति सैकंड। CPU जितने ज़्यादा GHz का होगा उतना ही तेज़ काम करेगा।

Computer System में CPU के तीन भाग होते हैं।

Arithmetic Logical Unit

CPU का यह भाग अंकगणितीय गणना, जैसे किन्हीं दो अंकों को जोड़ना, घटाना, गुणा करना, भाग करना या फिर तार्किक गणना, जैसे किन्ही दो अंकों में से सबसे बड़े या छोटे अंक का पता लगाना आदि, करने के काम आता है।

जब हम किसी तरह की अंकगणितीय या तार्किक गणना करने के लिए Computer को Command देते हैं तो, यह Command Binary Number में Convert हो कर ALU के पास पहुंचती है। ALU में प्रत्येक अंकगणितीय या तार्किक गणना करने के लिए अलग-अलग Path बने होते हैं। ALU User द्वारा दी हुई Command पर Processing करता है और उसे Memory Unit में भेज देता है, जहाँ से हमें Output मिल जाता है। – वह Unit जो पूरे Computer System को Control या Manage करने का काम करती है Control Unit कहलाती है।

Control Unit

CPU के इस भाग का कार्य किसी भी अन्य भाग की तुलना में सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसका प्रमुख कार्य Computer के सभी भागों द्वारा किए जाने वाले कार्यों पर निगरानी रखना है। जिस प्रकार CPU किसी भी Computer System का दिमाग़ होता है, उसी प्रकार Control Unit किसी भी Computer System के लिए तंत्रिका तंत्र की तरह होती है।

एक उदाहरण की सहायता से Control Unit को समझने का प्रयास करते हैं-
मान लीजिए हमें Hard Drive से किसी फ़ाइल को हमारे Pen Drive में Copy करना है। जब हम फ़ाइल को Copy करने के बाद Paste करते हैं तो Control Unit ही इस पूरी प्रक्रिया को Control करती है। Control Unit ही Computer System को बताती है की फ़ाइल को किस Address से Copy करना है और किस Address पर Paste करना है।

Memory Unit

यह Unit हमारे (User) Data को Computer System में सुरक्षित रूप से Save करने का काम करती है। यह दो प्रकार की होती है

  • Primary Memory
  • Secondary Memory

यह भी पढ़े: Cache Memory क्या होती है

Output Unit

वह Unit जो CPU द्वारा Processing के बाद प्राप्त परिणाम को हमारे सामने Show करने का काम करती है। Output Show करने के लिए Computer Monitor, Printer आदि Output Devices का Use किया जाता है।

कंप्यूटर की विशेषताएं/गुण क्या हैं

  • Speed – कंप्यूटर एक बहुत तेज़ गति से काम करने वाली मशीन है। बड़ी से बड़ी गणना को Computer बहुत कम समय में पूरा कर सकता है। कंप्यूटर के कार्य करने की गति इतनी तेज़ होती है कि, करोड़ों अंकगणितीय गणनाएं कंप्यूटर एक Second से भी कम समय में पूरी कर सकता है। विश्व का पहला प्रोसेसर 740 KHz का था, जो एक सैकंड में 92000 सूचनाओं को Process कर सकता था। आधुनिक प्रोसेसर एक सैकंड में 100 Billion से भी अधिक सूचनाओं को Process करने की क्षमता रखते हैं।
  • Accuracy – तेज़ गति से गणनाएं करने के बावजूद Computer द्वारा दिए गए परिणाम शत-प्रतिशत सही होते हैं। Computer कभी ग़लती नहीं करता है। अगर कंप्यूटर द्वारा दिए गए परिणाम ग़लत होते हैं, तो उसकी वजह ग़लत प्रोग्रामिंग या User द्वारा दी गई ग़लत Instructions होती है न कि कंप्यूटर।
  • Multi-Tasking – Computer बहुत सारे काम एक साथ कर सकता है। आधुनिक Computer इतने सक्षम होते हैं कि, अगर हम एक समय में अनेक काम करना चाहते हैं तो कंप्यूटर उसे आसानी से पूरा कर सकता है – जैसे हम किसी File को Copy करते हुए गाना सुन सकते हैं और चाहे तो साथ-साथ में Internet भी चला सकते हैं।
  • Storage – Computer में हमारे Data को सुरक्षित रखा जा सकता है- जैसे किसी बहुत ज़रूरी Excel File या किसी कंपनी के हिसाब को यदि हम किसी नोटबुक में लिख कर रखें तो उसके खो जाने या ख़राब होने का डर बना रहता है, जबकि Computer में उसे सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। Data को सुरक्षित रखने के साथ-साथ हम Computer में बड़ी से बड़ी साइज़ का Data रख सकते हैं, क्योंकि Computer के साथ Space की कोई दिक्कत नहीं होती है और यदि होती है तो उसे आसानी से दूर किया जा सकता है। हमारी पसंदीदा फ़िल्म, पसंदीदा गाने या फिर हमारे Photos आदि को हम Computer में आसानी से रख सकते हैं।
  • Computer एक मशीन है इसलिए इंसानी शरीर की तरह इसे थकावट नहीं होती है, जिससे Computer इंसान की तुलना में लगातार कई घंटों तक कार्य कर सकता है।
  • Computer एक स्वचालित मशीन है। एक बार आप किसी Program को Run करवा देते हैं तो, वह स्वत: ही काम करता रहता है आपको बार-बार उस पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं पड़ती है, जिसकी वजह से आपका बहुत सारा समय बचता है।
  • Security– कंप्यूटर एक बहुत ही सुरक्षित मशीन है। इसमें आप अपना Data पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं। अगर आपने कंप्यूटर में अपना Data Password के साथ सुरक्षित किया है तो किसी आम आदमी के लिए उस Data को चुराना आसान‌ नहीं है। जब तक की कोई बहुत बड़ा Hacker किसी खास प्रोग्राम की सहायता से उसे Hack ना कर ले।

कंप्यूटर का इतिहास

आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है। आधुनिक Computer भी गणना करने के लिए एक उपकरण की आवश्यकता की ही देन है। आज से हज़ारों साल पहले लोगों के पास Calculator या Computer नहीं होते थे, इसलिए गणना या हिसाब करना उस समय की सबसे बड़ी समस्या थी।

किसी भी उपकरण का आविष्कार और विकास अचानक से नहीं होता है। Computer का आधुनिक रूप भी सदियों के विकास का परिणाम है। आइए Computer के विकास को क्रम दर क्रम जानते हैं।

अबेकस (Abacus)

आज से हज़ारों साल पहले चीन में गणना करने के लिए एक उपकरण का आविष्कार किया गया, जिसे आज हम अबेकस के नाम से जानते हैं।

अबेकस लकड़ी का एक आयताकार फ्रेम होता है, जिसके दो भाग(Section) होते हैं। इस आयताकार फ्रेम में लकड़ी की कुछ Rods होती हैं, जो अलग-अलग अबेकस में अलग-अलग हो सकती हैं। लकड़ी की प्रत्येक Rod में लकड़ी या किसी अन्य धातु के Beads(मनका) भरे हुए होते हैं।

Chinese Abacus को Suanpan कहा जाता है। इसमें Rods की संख्या 7, 9, 11 या 13 होती है।

Wilhelm Schickard

अबेकस बनाए जाने के सदियों बाद सन् 1623 में जर्मनी के एक खगोल विज्ञानी Wilhelm Schickard ने एक गणना मशीन का आविष्कार किया।

पास्कल कैलकुलेटर

Wilhelm Schickard के बाद सन् 1642 में फ्रांसीसी गणितज्ञ Blaise Pascal ने अपने पिता की मदद करने के लिए एक गणना मशीन यानी कि Calculator का निर्माण किया, जिसे आज हम Pascal Calculator के नाम से जानते हैं।
इस मशीन की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इससे गुणा और भाग नहीं किए जा सकते थे।

Gottfried Leibniz

Blaise Pascal के कुछ सालों बाद सन् 1673 में Gottfried Leibniz नामक जर्मन दार्शनिक और गणितज्ञ ने एक Digital Mechanical Calculator का आविष्कार किया जिसे Stepped Reckoner के नाम से जाना जाता है।
क्या आप जानते हैं आधुनिक Computer में जो Binary Number System काम में लिया जाता है, वह Gottfried Leibniz का ही आविष्कार है।

Jacquard Loom

सन् 1801 में Joseph Marie Charles नाम के एक फ्रांसीसी बुनकर और व्यापारी ने एक क्रांतिकारी खोज की। Joseph Marie Charles ने एक स्वचालित करघा(Loom) बनाया। Joseph द्वारा इस Loom को Program किया गया था।
Joseph Marie Charles की खोज क्रांतिकारी खोज इसलिए कहीं जाती है क्योंकि आगे चलकर इसी खोज ने Programmable Machines के Development में अहम भूमिका निभाई।

Joseph Marie Charles द्वारा बनाया गया स्वचालित करघा कपड़े पर Automatic Design बनाता था। इसके लिए करघे में Wooden Punch Cards का प्रयोग किया गया था। आधुनिक कंप्यूटर में भी कुछ-कुछ वैसे ही Punch Cards का प्रयोग किया जाता है।

Arithmometer

Arithmometre kya hai

सन् 1820 में फ्रांस के ही एक और आविष्कारक Thomas de Colmar ने पहला Commercial Mechanical Calculator बनाया, जिसे Arithmometer नाम दिया गया। Thomas de Colmar ने इस Calculator का Patent करवाया। सन् 1852 में इसका Production किया गया तथा इस Calculator का प्रयोग लोगों द्वारा अपने घर और ऑफिस में बड़े पैमाने पर किया गया।

Charles Babbage

Computer के पिता कहे जाने वाले Charles Babbage ने सन् 1820 में भाप से चलने वाला पहला Mechanical Computer बनाया, जिसे Difference Engine के नाम से जाना जाता है। इस इंजन में Charles Babbage ने Decimal Number System का प्रयोग किया तथा यह इंजन न्यूटन के सिद्धांत Divided Differences पर आधारित था।

Difference Engine के बाद Charles Babbage ने एक और भाप से चलने वाला Analytic Engine बनाया जो आगे चलकर आधुनिक कंप्यूटर के निर्माण का आधार बना। Charles Babbage ने इस इंजन को पूरी तरह स्वचालित बनाने के लिए Joseph Marie Charles द्वारा बनाए गए स्वचालित Loom की तकनीक का इस्तेमाल किया था।

इस इंजन के चार प्रमुख हिस्से थे।

  • Mill – Analytic Engine का यह हिस्सा आधुनिक कंप्यूटर के CPU की तरह काम करता था।
  • Store – यह हिस्सा Numbers को Store करने के लिए होता था। आधुनिक कंप्यूटर में जो काम Memory का होता है, वही काम Store का होता था। इसमें 50 Digits तक के सैकड़ों Numbers Store किए जा सकते थे।
  • Reader – यह हिस्सा मशीन में Numbers Input करवाने के लिए बनाया गया था। Charles Babbage ने Analytic Engine में Numbers Input करवाने के लिए Joseph Marie Charles की Punch Cards वाली तकनीक का प्रयोग किया था। कोई भी गणना करने के लिए Numbers Punch Cards की सहायता से मशीन में Input किए जाते थे।
  • Printer – मशीन का यह हिस्सा Output के लिए Design किया गया था।

Ada Lovelace

Ada Lovelace चार्ल्स बैबेज की छात्रा थी और चार्ल्स बैबेज द्वारा किए गए कार्यों से बहुत प्रभावित थी। Charles Babbage द्वारा बनाए गए Analytic Engine की Making Process को Ada Lovelace ने बहुत क़रीब से देखा था।


एक रोज़ Analytic Engine पर इटली के एक इंजीनियर Luigi Federico Menabrea द्वारा लिखे गए एक लेख का अनुवाद करते हुए Ada Lovelace ने दुनिया का पहला कंप्यूटर प्रोग्राम लिखा। इसीलिए Ada Lovelace को दुनिया का पहला Programmer कहा जाता है। हालांकि Ada का यह प्रोग्राम हमेशा Paper पर ही रहा, लेकिन फिर भी Ada ने जो किया उसके लिए Ada Lovelace को दुनिया का पहला प्रोग्रामर कहा जाता है।

Herman Hollerith

Hollerith ने United States जनगणना को जल्दी और बेहतर तरीक़े से करवाने के लिए सन् 1890 में बिजली से चलने वाली एक Tabulating मशीन का आविष्कार किया। इस मशीन में किसी व्यक्ति या Account का Data Store करने के लिए Herman Hollerith ने Joseph Marie Charles और चार्ल्स बैबेज द्वारा प्रयोग में लाई गई Punch Card तकनीक का बहुत ही Smartly प्रयोग किया था।

ENIAC – Electronic Numerical Integrator And Computer

सन् 1946 में John Mauchly और John Presper Eckert ने संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर डिजाइन किया जिसे ENIAC एक नाम दिया गया। मुख्य रूप से द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान Artillery Firing Tables की गणना करने के लिए इस कंप्यूटर को बनाया गया था।

यह अब तक का पहला General Purpose इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था, जिसे Reprogram किया जा सकता था।

यह एक Moduler कंप्यूटर था, जिसमें अलग-अलग कार्य करने के लिए 40 Panels बने हुए थे। एनिऐक जोड़ तथा घटाव करने के साथ-साथ 10 अंकों वाली दशमलव संख्या को मेमोरी में स्टोर भी कर सकता था।

एनिऐक Decimal Number System पर आधारित कंप्यूटर था, जिसमें 18000 Vacuum Tubes, 70000 Resistors तथा 1500 Relays का प्रयोग किया गया था।

इस कंप्यूटर में Input के लिए IBM Card Reader का तथा Output के लिए Punch Cards का प्रयोग किया जाता था।

एनिऐक अब तक का सबसे तेज़ गति से काम करने वाला कंप्यूटर था। एनिऐक 5000 Operations Per Second की गति से काम कर सकता था।

कंप्यूटर की पीढ़ियां- Computer Generation In Hindi

Computer ki Pidiya in Hindi - computer generations in Hindi

कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी(1940-1956)

  • इस पीढ़ी के कंप्यूटर मशीनी भाषा पर काम करते थे, जिनमें Electronic Component के रूप में Vacuum Tubes उसका प्रयोग किया जाता था।
  • Data Store करने के लिए Main Memory के रूप में Magnetic Drums और Magnetic Tapes का प्रयोग होता था।
  • Input और Output Devices के लिए Punch Cards और Paper Tape का प्रयोग किया जाता था।
  • इस पीढ़ी के कुछ मुख्य कंप्यूटर – ENIAC, UNIVAC 1, IBM 650, IBM 701
  • प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े और वज़न में बहुत भारी होते थे।
  • इस पीढ़ी के Computers में Main electronic Component Vacuum Tubes का प्रयोग होता था, जो बहुत जल्दी ख़राब हो जाते थे और उन्हें बार-बार बदलना पड़ता था।
  • Vacuum Tubes की वजह से कंप्यूटर के तापमान को सामान्य बनाए रखना एक बहुत बड़ी समस्या थी।
  • इन कंप्यूटर में Data Store करने की क्षमता बहुत कम थी।

कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी(1956-1963)

  • इस समय तक Transistor की खोज की जा चुकी थी, अतः इस पीढ़ी के Computers में Main Electronic Component के रूप में Vacuum Tubes की जगह Transistor का उपयोग होने लगा।
  • Transistor की खोज William Shockley, John Bardeen और Walter Brattain ने की थी
  • TRADIC पहला ऐसा Computer था जिसमें Transistor का प्रयोग किया गया था, जिसे Jean Howard Felker ने U.S. Air force के लिए बनाया था।
  • द्वितीय पीढ़ी के Computers Assembly Language पर काम करते थे, जो कि एक Low Level Programming Language थी।
  • Data Store करने के लिए Main Memory के रूप में Magnetic Core और Magnetic Tapes/Disk का प्रयोग किया गया था।
  • Input और Output Devices के लिए Punch Cards और Magnetic Tapes का प्रयोग किया गया था।
  • इस पीढ़ी के Computers प्रथम पीढ़ी के Computers की तुलना में आकार में छोटे तथा वज़न में हल्के थे।
  • इस पीढ़ी के कुछ मुख्य कंप्यूटर – IBM 1401, IBM 7090, IBM 7094, UNIVAC 1107

कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी (1964-1971)

  • इस पीढ़ी के Computers में Transistor की जगह Integrated circuits का प्रयोग किया गया था, जिसकी वजह से इस पीढ़ी के Computers न केवल आकार में छोटे थे बल्कि उनके काम करने की क्षमता एवं गति भी पहले के Computers से बेहतर थी।
  • Integrated circuit की खोज Robert Noyce और Jack Kilby ने सन् 1958 में की थी।
  • Data Store करने के लिए Main Memory के रूप में Magnetic Core और Magnetic Tape/Disk का प्रयोग होता था।
  • इस पीढ़ी के Computers में ही पहली बार Operating System का प्रयोग किया गया था, जो CUI आधारित Operating System था।
  • इस पीढ़ी के Computers FORTRAN, BASIC, COBOL, C, Pascal जैसी High level Programming Language पर आधारित थे।
  • Input/Output Devices के रूप में Keyboard, Monitor और Printers का प्रयोग किया जाता था।
  • इस पीढ़ी के कुछ मुख्य कंप्यूटर – IBM 360, IBM 370, PDP-11, UNIVAC 1108

कंप्यूटर की चौथी पीढ़ी(1972-2010)

  • इस पीढ़ी के Computers में माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग किया गया था। पहला CPU Intel Company ने बनाया था जिसका नाम Intel 4004 था।
  • इस पीढ़ी के Computers Very Large-Scale Integration(VLSI) तकनीक पर आधारित थे।
  • इस पीढ़ी के Computers GUI आधारित Operating System पर काम करते थे, जो कि Use करने में बहुत ही आसान था।
  • Personal Computer इसी पीढ़ी की देन है। पहला Personal Computer Altair था, जिसे MITS Company ने 1974 में बनाया था और इसमें Intel 8800 CPU का Use हुआ था।
  • इस पीढ़ी में C तथा C++ जैसी High level Programming Language का प्रयोग किया गया था
  • Operating System GUI आधारित होने के कारण इस पीढ़ी में Mouse का प्रयोग किया जाता था।

कंप्यूटर की पांचवीं पीढ़ी(2010- Present)

  • इस पीढ़ी के Computers आकार में बहुत छोटे और काम करने में बहुत तेज़ है।
  • इस पीढ़ी के Computers Ultra Large-Scale Integration(ULSI) तकनीक पर आधारित थे।
  • इस पीढ़ी की विशेषता Artificial intelligence है, जिसमें Computer को मानवीय गुणों को समझने लायक बनाना है। Windows 8, 10, Microsoft’s Cortana और Apple’s Siri Artificial intelligence के उदाहरण हैं।
  • इस पीढ़ी के Computers Multi-processor-based है, जिसे Parallel Computing कहा जाता है। Parallel Computing में किसी बहुत बड़े Data या Problem के टुकड़े करके अलग-अलग Processor द्वारा Process किया जाता है, जिससे Computer के काम करने की गति बहुत तेज़ हो जाती है।
  • इस पीढ़ी के Computers में Data Store करने की क्षमता बहुत अधिक है। Primary Memory के रूप में RAM तथा ROM का प्रयोग किया जाता है और Secondary Memory के रूप में SSD या HDD का प्रयोग किया जाता है।
  • इस पीढ़ी के Computers के लिए Program High level Programming Language जैसे C, C++, Java, Python, .Net आदि में Program किए जाते हैं।
  • इस पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर – Desktop, Laptop, NoteBook, UltraBook, Chromebook

Conclusion

आशा है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद कंप्यूटर सम्बंधित आपकी जानकारी थोड़ी बढ़ी ही होगी, “Computer Kya Hai” से सम्बंधित आपको सारी जानकारी मिल गयी होगी। आप अपने प्रश्न कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है, और ऐसी ही जानकारी के लिए ViaHindi को बुकमार्क जरूर करे।

यह भी पढ़े: Keyboard में Insert Key का Use क्या है?

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