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पूर्ण विराम चिह्न (चिन्ह): प्रयोग और नियम | Purn Viram Chinh in Hindi

Purn Viram Chinh

Purn Viram Chinh

पूर्ण विराम का चिन्ह (।) होता है। हिंदी भाषा में पूर्ण विराम चिन्ह के दो रूप प्रचलित हैं, जिसमें पहले रूप को एक खड़ी पाई (।) और दूसरे रूप को दो खड़ी पाई (।।) कहते हैं। यह चिह्न हिंदी भाषा का अपना चिह्न है, इस चिह्न के अतिरिक्त हिंदी भाषा में प्रयुक्त होने वाले समस्त विराम चिह्न अंग्रेज़ी भाषा से आए हैं। प्राचीन समय समय में जब पद्य हिंदी का प्रयोग अधिक किया जाता था, तब पूर्ण विराम चिन्ह के दोनों रूपों का ही प्रयोग किया जाता था।

जैसे:

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

आधुनिक समय में अंग्रेज़ी भाषा के प्रभाव में आकर बहुत से लोग हिंदी के पूर्णविराम चिन्ह (PurnViram Chinh) की जगह अंग्रेज़ी के फुल स्टॉप (Full Stop Mark) का प्रयोग करने लग गए हैं, जो सही नहीं है।

पूर्ण विराम चिन्ह का प्रयोग क्रिया रहित वाक्यों में भी किया जाता है, इसलिए इस चिह्न का प्रयोग करते समय क्रिया के होने या नहीं होने का वहम नहीं होना चाहिए।

पूर्ण विराम चिन्ह किसे कहते हैं (Purn Viram Chinh Kise Kahate Hain)

पूर्ण विराम चिन्ह का अर्थ पूरी तरह ठहरना होता है। वाक्य में जहाँ एक बात, एक विचार या वाक्य के ही पूर्ण हो जाने पर जिस विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है उसे पूर्ण विराम चिन्ह (Purn Viram Chinh) कहते हैं। पूर्ण विराम चिन्ह वाक्य की समाप्ति का बोध करवाता है। जैसे: मोहन पत्र लिखता है। गीता चाय बनाती है।

Purn Viram Chinh

पूर्ण विराम चिन्ह का प्रयोग (Purn Viram Chinh Ka Prayog)

  1. पूर्ण विराम चिन्ह का प्रयोग साधारण वाक्य, मिश्रित वाक्य तथा संयुक्त वाक्य के अन्त में किया जाता है।

उदाहरण के लिए:

  1. पूर्ण विराम चिन्ह का प्रयोग प्रश्नवाचक वाक्यों और विस्मयादिबोधक वाक्यों के अन्त में नहीं किया सकता, क्यूँकि प्रश्नवाचक वाक्यों और विस्मयादिबोधक वाक्यों के अन्त में क्रमशः प्रश्नवाचक चिह्न और विस्मयादिबोधक चिह्न का प्रयोग करने से ही वाक्य के सम्पूर्ण अर्थ का बोध हो जाता है।

प्रश्नवाचक वाक्यों और विस्मयादिबोधक वाक्यों को छोड़कर सभी तरह के वाक्यों के साथ पूर्ण विराम चिह्न का प्रयोग किया जा सकता है।

उदहारण के लिए:

उपरोक्त उदाहरणों में आप देख सकते हैं की जहाँ प्रश्नवाचक चिन्ह या विस्मयादिबोधक चिन्ह प्रयुक्त हुआ है वहाँ पूर्ण विराम चिन्ह का प्रयोग नहीं हुआ, इसके अतिरिक्त सभी वाक्यों के अन्त में पूर्ण-विराम चिन्ह का प्रयोग हुआ है।

  1. ऐसे वाक्य जिनमें प्रश्न का भाव तो होता है, लेकिन जो प्रश्नवाचक वाक्य नहीं होते (अप्रत्यक्ष प्रश्नवाचक वाक्य) ऐसे वाक्यों के अन्त में भी पूर्ण विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण के लिए:

  1. पद्य हिंदी में दोहा, सोरठ, चौपाई आदि के अन्त में पूर्ण विराम चिन्ह (Purn Viram Chinh) का प्रयोग सदियों से किया जाता रहा है।

उदाहरण के लिए:

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।

उपरोक्त दोनों उदाहरणों में आप देख सकते हैं की दोहा और चौपाई में पूर्ण विराम चिन्ह (Purn Viram Chinh) का प्रयोग किया गया है।

  1. वाक्य में समुच्चयबोधक अव्यय पदों (और, परन्तु, अथवा, इसलिए) से पहले भी पूर्ण विराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

जैसे:

ऐसा कोई भी मनुष्य नहीं जो संसार में कुछ न कुछ लाभकारी कार्य न कर सकता हो। और ऐसा कोई भी मनुष्य नहीं जिसके लिए संसार में एक न एक उचित स्थान हो।

पूर्ण विराम चिन्ह के उदाहरण (Purn Viram Chinh Ke Udaharan)

उपरोक्त सभी उदाहरणों में एक विचार या वाक्य पूर्ण होने पर पूर्ण विराम चिन्ह का प्रयोग किया गया है।

पूर्ण विराम चिन्ह वाक्य (Purn Viram Chinh Vakay)

पूर्ण विराम चिन्ह का प्रयोग कब किया जाता?

पूर्ण विराम चिन्ह का प्रयोग किसी वाक्य की समाप्ति, किसी एक विचार या बात की समाप्ति या किसी वाक्यांश के अन्त में किया जाता है। पूर्ण विराम चिन्ह लगाने का अर्थ यह होता है की वाक्य समाप्त हो चूका है।

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