अकर्मक क्रिया की परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

Akarmak Kriya

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अकर्मक क्रिया की परिभाषा (Akarmak Kriya Ki Paribhasha)

क्रिया का वह रूप जिसमें क्रिया द्वारा होने वाले व्यापार का फल कर्म पर न पड़कर कर्ता पर पड़ता हो उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। अकर्मक का अर्थ कर्म रहित होता है, अर्थात जिस वाक्य में अकर्मक क्रिया होगी उस वाक्य में कर्म अनुपस्थित होगा। अकर्मक क्रिया में कर्म का प्रयोग किए बिना ही वाक्य का पूर्ण भाव स्पष्ट हो जाता है। जैसे:-

लड़का चलता है। इस वाक्य में ‘चलता है’ क्रिया का व्यापार और उसका फल वाक्य के कर्ता ‘लड़का’ पर पड़ रहा है; इसलिए ‘चलता है’ क्रिया अकर्मक क्रिया है।

हिंदी व्याकरण के अनुसार कुछ क्रियाएँ ऐसी होती हैं जो प्रयोग की दृष्टि से सकर्मक एवं अकर्मक दोनों होती हैं। जैसे:- खुजलाना, भरना, लजाना, भूलना, बदलना, ललचाना, घबराना इत्यादि।

अकर्मक क्रिया के उदाहरण (Akarmak Kriya Ke Udaharan)

  • बूँद-बूँद करके घड़ा भरता है।
  • मेरे हाथ खुजलाते हैं।
  • लड़का सोता है।
  • गाड़ी दिखाई देती है।
  • सूरज निकला।
  • बच्चा खेलता है।
  • राधा गाती है।
  • वह चिल्लाता है।
  • राम जाता है।
  • विवेक नहाता है।

अकर्मक क्रिया के भेद (Akarmak Kriya Ke Bhed)

अकर्मक क्रिया के दो भेद होते हैं:- अपूर्ण अकर्मक क्रिया और पूर्ण अकर्मक क्रिया।

  1. अपूर्ण अकर्मक क्रिया
  2. पूर्ण अकर्मक क्रिया

अपूर्ण अकर्मक क्रिया की परिभाषा (Apurnakarmak Kriya Ki Paribhasha)

अकर्मक क्रिया का वह रूप जिसमें कर्ता के विषय में पूर्ण विधान करने के लिए क्रिया के साथ किसी संज्ञा या विशेषण शब्द की आवश्यकता रहती हो उसे अपूर्ण अकर्मक क्रिया कहते हैं।

अपूर्ण अकर्मक क्रिया में जो संज्ञा या विशेषण शब्द कर्ता का पूर्ण आशय पूरा करने के लिए प्रयुक्त होते हैं उन्हें पूर्ति कहते हैं। हिंदी व्याकरण के अनुसार दिखाना, निकलना, ठहरना, बनना, रहना, होता जैसी क्रियाएँ अपूर्ण अकर्मक क्रियाएँ होती है।

अपूर्ण अकर्मक क्रिया के उदाहरण (Apurnakarmak Kriya Ke Udaharan)

  • साधु चोर निकला।
  • वह बीमार रहा।
  • आप मेरे मित्र ठहरे।
  • वह व्यक्ति विदेशी दिखता है।
  • रमेश चतुर है।
  • विजय बेईमान निकला।
  • राधा एक अच्छी लड़की थी।

उपरोक्त उदाहरणों में चोर, बीमार, मित्र, चतुर आदि शब्द पूर्ति शब्द हैं।

पूर्ण अकर्मक क्रिया की परिभाषा (Purnakarmak Kriya Ki Paribhasha)

अकर्मक क्रिया का वह रूप जिसमें क्रिया के साथ न तो कर्म और न ही किसी पूर्ति शब्द या पूरक शब्द की आवश्यकता होती हो उसे पूर्ण अकर्मक क्रिया कहते हैं। वास्तव में अकर्मक क्रिया ही पूर्ण अकर्मक क्रिया होती है, अर्थात अकर्मक क्रिया का वास्तविक रूप ही पूर्ण अकर्मक क्रिया होती है।

पूर्ण अकर्मक क्रिया के उदाहरण (Purnakarmak Kriya Ke Udaharan)

  • बच्चा रो रहा है।
  • कुछ बालक हँस रहे थे।
  • वह रात भर नहीं सोया।
  • चिड़िया आकाश में उड़ती है।

अकर्मक क्रिया से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न

अकर्मक क्रिया का अर्थ क्या है?

अकर्मक क्रिया का अर्थ कर्म के बिना होता है. अकर्मक क्रिया के साथ कर्म प्रयुक्त नहीं होता है। वे क्रियाएँ, जिनका प्रभाव कर्म पर न पड़कर वाक्य में प्रयुक्त कर्ता पर पड़ता है, उन्हें अकर्मक क्रिया कहते हैं. जैसे: महेश दौड़ रहा है वाक्य में कर्म कारक उपस्थित नहीं है।

अकर्मक क्रिया कैसे पहचाने?

अकर्मक क्रिया को पहचानने के लिए वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से पहले क्या लगाकर वाक्य को सवाल की तरह पढ़ें। यदि कर्म के रुप में जवाब नहीं मिले तो उस वाक्य में अकर्मक क्रिया होगी, अर्थात जिस वाक्य में कर्म उपस्थित नहीं हो उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया अकर्मक क्रिया होगी।

अकर्मक क्रिया कितने प्रकार के होते हैं?

अकर्मक क्रिया दो प्रकार की होती है:- अपूर्ण अकर्मक क्रिया और पूर्ण अकर्मक क्रिया। अपूर्ण अकर्मक क्रिया में कर्ता का सम्पूर्ण आशय स्पष्ट करने के लिए किसी संज्ञा या विशेषण शब्द की आवश्यकता रहती है जबकि पूर्ण अकर्मक क्रिया में किसी तरह के पूरक शब्द की आवश्यकता नहीं होती है।

अकर्मक क्रिया कब सकर्मक बन जाती है?

यदि किसी अकर्मक क्रिया को कर्म के सहित लिख दिया जाए तो अकर्मक क्रिया सकर्मक क्रिया बन जाती है।

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