संयुक्त क्रिया की परिभाषा, भेद और उदाहरण

Sanyukt Kriya | संयुक्त क्रिया

इस लेख में हम संयुक्त क्रिया के बारे में पढ़ेंगे। इस लेख में हम संयुक्त क्रिया की परिभाषा, संयुक्त क्रिया के भेद और संयुक्त क्रिया के उदाहरणों के बारे में विस्तृत अध्ययन करेंगे। दरअसल, Sanyukt Kriya दो या अधिक क्रियाओं का मेल होती है, जिसमें एक क्रिया कृदंत क्रिया तो दूसरी सहायक क्रिया होती है।

Sanyukt Kriya

Sanyukt Kriya Kise Kahate Hain | संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं

दो या दो से अधिक भिन्न भिन्न अर्थ वाली क्रियाओं के मेल से बनने वाली क्रिया को संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) कहते हैं। संयुक्त क्रियाओं का निर्माण धातु से बने हुए शब्दों (कृदंत) के आगे सहायक या सहकारी क्रियाएं जोड़ देने से होता है। संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) अकर्मक एवं सकर्मक दोनों हो सकती हैं।

जब कृदंत की क्रिया मुख्य क्रिया हो तथा काल की क्रिया कृदंत की विशेषता बताए तो वहाँ दोनों क्रियाओं के संयुक्त रूप को संयुक्त क्रिया कहते हैं। संयुक्त क्रिया में मुख्य क्रिया का कृदंत और सहायक क्रिया के काल का रूप होता है।

बारात आने पर स्वागत करना।

उपरोक्त वाक्य में ‘आने’ मुख्य क्रिया है और ‘स्वागत करना’ सहायक क्रिया है। यहाँ मुख्य क्रिया और सहायक क्रिया के मेल से संयुक्त क्रिया बन रही है। अतः उपरोक्त वाक्य संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) का उदाहरण है।

संयुक्त क्रिया के उदाहरण | Sanyukt Kriya Ke Udaharan

  • रमेश चाय पी रहा है।
  • बच्चा खाना खाता है।
  • वह संस्कृत बोल सकता है।
  • विक्रम ने नाश्ता कर लिया है।
  • वे स्टेडियम पहुँच चुके होंगे।
  • राधे चाय पी चुका था।
  • पिताजी ने भोजन कर लिया है।

संयुक्त क्रिया के भेद | Sanyukt Kriya Ke Bhed

संयुक्त क्रिया के 15 भेद होते हैं, जो निम्नलिखित हैं।

आरंभबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) के जिस रुप से किसी क्रिया के आरंभ होने का बोध होता हो उसे आरंभबोधक क्रिया कहते हैं। आरंभबोधक क्रिया का निर्माण क्रियार्थक संज्ञा के विकृत रूप से होता है। यह क्रिया ‘लगना’ क्रिया के योग से बनती है।

जैसे:-

  • राधा खाने लगी।
  • मीना जाने लगी।

अनुमतिबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) के जिस रुप से अनुमति देने का बोध होता हो उसे अनुमति बोधक क्रिया कहते हैं। अनुमति बोधक क्रियाएँ सदैव सकर्मक होती हैं। यह क्रिया ‘देना’ क्रिया के योग से बनती है।

अनुमतिबोधक क्रिया का निर्माण क्रियार्थक संज्ञा के विकृत रूप से होता है।

जैसे:-

  • उसे जाने दीजिए।
  • राधा ने कविता को बोलने नहीं दिया।

अवकाशबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) के जिस रुप से प्राप्त करने का बोध होता हो उसे अवकाशबोधक क्रिया कहते हैं। अवकाश बोधक क्रिया अनुमति बोधक की विरोधिनी क्रिया है। अवकाशबोधक क्रिया का निर्माण ‘पाना’ क्रिया के योग से होता है।

जैसे:-

  • मेरी बात ना होने पाई।
  • जल्दी के मारे मैं चिट्ठी न लिखने पाया।

नित्यताबोधक संयुक्त क्रिया

वर्तमानकालिक कृदंत के आगे आना, जाना या रहना क्रिया जोड़ने से जिस क्रिया का निर्माण होता है उसे नित्यताबोधक क्रिया कहते हैं। नित्यताबोधक क्रिया में कृदंत के लिंग और वचन विशेष्य के अनुसार बदलते हैं।

जैसे:-

  • पेड़ बढ़ता गया पानी बरसता गया।
  • रीमा पढ़ती रहती है।

तत्परताबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) का वह रूप जो अकर्मक क्रिया के भूतकाल कृदंत के आगे ‘जाना’ क्रिया जोड़ देने से बनता हो उसे तत्परताबोधक संयुक्त क्रिया कहते हैं। तत्परता बोधक क्रिया का निर्माण भूतकालिक कृदंत से होता है।

जैसे:-

  • मारे चिंता के वह मारा जाता था।
  • लड़की आई जाती है।

अभ्यासबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) का वह रूप जो भूतकालिक कृदंत के आगे ‘करना’ क्रिया जोड़ देने से बनता हो उसे अभ्यासबोधक क्रिया कहते हैं। तत्परता बोधक क्रिया की तरह ही इस क्रिया का निर्माण भी भूतकालिक कृदंत से होता है।

इच्छाबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) का वह रूप जो भूतकालिक कृदंत के आगे ‘चाहना’ क्रिया जोड़ देने से बनता हो उसे इच्छाबोधक क्रिया कहते हैं।

अवधारणबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) का वह रूप जो पूर्वकालिक कृदंत के आगे उठना, बैठना, आना, लेना, देना आदि क्रियाएं जोड़ने से बनता हो उसे अवधारणबोधक क्रिया कहते हैं। इस क्रिया का निर्माण पूर्वकालिक कृदंत के योग से होता है।

शक्तिबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया (Sanyukt Kriya) का वह रूप जो पूर्वकालिक कृदंत के आगे ‘सकना’ क्रिया जोड़ने से बनता हो उसे शक्ति बोधक क्रिया कहते हैं।

जैसे:-

  • रमेश जा सकता है।

पूर्णताबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया का वह रूप जो पूर्वकालिक कृदंत के आगे ‘चुकना’ क्रिया जोड़ने से बनता हो उसे पूर्णताबोधक क्रिया कहते हैं।

जैसे:-

  • किशन यह काम कर चुका।
  • किशन जा चुका।

योग्यताबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया का वह रूप जो अपूर्ण क्रियाद्योतक के आगे ‘बनना’ क्रिया जोड़ने से बनता हो उसे योग्यताबोधक क्रिया कहते हैं।

जैसे:-

  • श्याम से चलते नहीं बनता।
  • सीता से पुस्तक पढ़ते नहीं बनता।

योग्यताबोधक क्रिया पराधीनता या विशेषता के अर्थ में भी आती है।

निरंतरताबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया का वह रूप जो सकर्मक क्रिया के पूर्ण क्रियाद्योतक कृदंत के आगे ‘जाना’ क्रिया जोड़ने से बनता हो उसे निरंतरताबोधक क्रिया कहते हैं।

जैसे:-

  • पढ़े जाओ।
  • महेश यह काम किए जाता है।

निश्चयबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया का वह रूप जो पूर्ण क्रियाद्योतक कृदंत के आगे अवधारण क्रिया की सहायक क्रियाएँ (लेना, देना, डालना, बैठना) जोड़ने से बनता हो उसे निश्चयबोधक क्रिया कहते हैं।

जैसे:-

  • वह खाना दिये देता हूँ।
  • वह मुझे मारे डालती है।

नामबोधक संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया का वह रूप जो संज्ञा या विशेषण के साथ क्रिया जोड़ने से बनता हो उसे नामबोधक क्रिया कहते हैं। जैसे:- स्वीकार करना, दिखाई देना, भस्म करना, याद होना, स्वीकार होना, विदा करना, सुनाई देना इत्यादि।

जैसे:-

  • लड़का दिखाई दिया।

पुनरुक्त संयुक्त क्रिया

संयुक्त क्रिया का वह रूप जिसमें समान अर्थ वाली या समान ध्वनि वाली क्रियाओं का संयोग होता हो उसे पुनरुक्त क्रिया कहते हैं। जैसे:- पढ़ना लिखना, करना धरना, मिलना जुलना इत्यादि।

FAQs

संयुक्त क्रिया कैसे पहचाने?

संयुक्त क्रिया को पहचानने के लिए मुख्य क्रिया एवं सहायक क्रिया को देखना होता है, क्योंकि संयुक्त क्रिया का निर्माण मुख्य क्रिया और सहायक क्रिया से होता है.

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