क्रिया किसे कहते हैं – परिभाषा, भेद एवं उदाहरण – For Competitive Exams 2021

kriya ki paribhasha evam kiriya ke bhed
क्रिया किसे कहते हैं
kriya ki paribhasha evam kiriya ke bhed

Table of Contents

क्रिया की परिभाषा(Kriya Ki Paribhasha)

क्रिया किसे कहते हैं – किसी वाक्य में प्रयुक्त वह शब्द जिसके द्वारा किसी काम का करना या होना पाया जाता है, उसे क्रिया कहते हैं। क्रिया एक विकारी शब्द है, जिसका अर्थ ‘काम’ होता है। अधिकतर क्रिया शब्दों की उत्पत्ति धातु शब्दों से होती है। मूल धातु शब्द में ‘ना’ प्रत्यय लगाने से क्रिया शब्द बनते हैं। किसी वाक्य में लिंग, वचन, काल आदि के आधार पर क्रिया का रूप परिवर्तित होने के साथ साथ संज्ञा एवं सर्वनाम के आधार पर भी क्रिया का रूप परिवर्तित होता है।

क्रिया के उदाहरण:- 

  1. विक्रम पढ़ रहा है। इस वाक्य में विक्रम द्वारा पढ़ाई काम का करना पाया जा रहा है। अतः इस वाक्य में ‘पढ़ रहा है’ क्रिया पद है। 
  2. शास्त्री जी भारत के प्रधानमंत्री थे। इस वाक्य में स्पष्ट रूप से किसी काम का करना दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन काम का होना पाया जा रहा है। अतः इस वाक्य में ‘थे’ क्रिया पद होगा।
  3. महेश क्रिकेट खेल रहा है। इस वाक्य में महेश द्वारा क्रिकेट खेला जा रहा है। अतः क्रिकेट खेलने का काम का करना पाया जा रहा है। इस वाक्य में ‘खेल रहा है’ क्रिया पद होगा।
  4. सुरेश खेल रहा है। इस वाक्य में कर्म कारक स्पष्ट रूप से लिखा हुआ नहीं है, लेकिन फिर भी गौण रूप में कर्म कारक उपस्थित है। ‘सुरेश खेल रहा है’, इसका अर्थ हुआ की सुरेश कोई न कोई खेल तो यकीनन खेल रहा है। अतः ‘खेल रहा है’ इस वाक्य में क्रिया पद है।

क्रिया का वर्गीकरण

कर्म के आधार पर क्रिया के भेद

कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं।

  • सकर्मक क्रिया
  • अकर्मक क्रिया

सकर्मक क्रिया किसे कहते हैं

Sakrmak kriya Kise Kahte hain
सकर्मक क्रिया किसे कहते हैं

सकर्मक क्रियावे क्रियाएँ, जिनका प्रभाव वाक्य में प्रयुक्त कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़ता है, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं।सकर्मक शब्द ‘स’ और ‘कर्मक’ से मिलकर बना है, जहाँ ‘स’ उपसर्ग का अर्थ ‘साथ में’ तथा ‘कर्मक’ का अर्थ ‘कर्म के’ होता है। अतः सकर्मक का अर्थ हुआ – ‘कर्म के साथ में’।

आसान भाषा में कहें तो, वे क्रियाएं, जिनके साथ कर्म का होना आवश्यक होता है अर्थात बिना कर्म के वाक्य का संपूर्ण भाव प्रकट नहीं होता है सकर्मक क्रिया होती हैं।

सकर्मक क्रिया के उदाहरण:- 

  1. गीता चाय बना रही है। इस वाक्य में ‘बना रही है’ क्रियापद है। इस वाक्य में कर्म कारक ‘चाय’ है। आप स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि क्रियापद का सीधा प्रभाव कर्म पर पड़ रहा है, न की कर्ता कारक पर। अतः ‘बना रही है’ सकर्मक क्रिया है।
किसी वाक्य में सकर्मक क्रिया कैसे पहचाने

सबसे पहले आपको वाक्य में क्रिया पद से पहले ‘क्या’ लगाकर वाक्य को सवाल की तरह पढ़ना है। यदि उस वाक्य में सकर्मक क्रिया होगी तो, आपको वाक्य में प्रयुक्त ‘कर्म’ के रूप में जवाब मिल जाएगा। यदि आपको जवाब नहीं मिले तो यकीनन वह वाक्य सकर्मक क्रिया का उदाहरण नहीं है।

उदाहरण:- 

  1. रमेश खाना बना रहा है। इस वाक्य में हम क्रिया पद ‘बना रहा है’ से पहले क्या लगाकर वाक्य को पढ़ते हैं – रमेश क्या बना रहा है? इस सवाल का जवाब होगा कि – ‘खाना’ बना रहा है। अतः इस वाक्य में ‘बना रहा है’ सकर्मक क्रिया है।
सकर्मक क्रिया के दो भेद होते हैं।
  • पूर्ण सकर्मक क्रिया
  • अपूर्ण सकर्मक क्रिया
पूर्ण सकर्मक क्रिया किसे कहते है

पूर्ण सकर्मक क्रियाकिसी वाक्य में जिस सकर्मक क्रिया के साथ ‘कर्म’ के अतिरिक्त किसी अन्य पूरक शब्द की आवश्यकता नहीं होती है, उस क्रिया को पूर्ण सकर्मक क्रिया कहते हैं।

पूर्ण सकर्मक क्रिया का उदाहरण:- 

  1. महेश ने घर बनाया। यह वाक्य सकर्मक क्रिया का उदाहरण है। इस वाक्य में ‘बनाया’ क्रियापद एवं ‘घर’ कर्म है। आप देख सकते हैं कि कर्म के साथ किसी भी तरह का पूरक शब्द इस्तेमाल नहीं किया गया है। अतः इस वाक्य में ‘बनाया’ पूर्ण सकर्मक क्रिया है।

पूर्ण सकर्मक क्रिया के दो भेद होते हैं।

  • एक कर्मक पूर्ण सकर्मक क्रिया – यदि किसी वाक्य में सकर्मक क्रिया के साथ सिर्फ़ एक कर्म प्रयुक्त हुआ हो तो, उसे एक कर्मक क्रिया कहते हैं।

उदाहरण:- 

  1. विजय भोजन कर रहा है।
  • द्विकर्मक पूर्ण सकर्मक क्रिया – यदि किसी वाक्य में पूर्ण सकर्मक क्रिया के साथ दो कर्म (प्रधान कर्म एवं गौण कर्म) प्रयुक्त हुए हों तो, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं।

उदाहरण:- 

  1. मां बच्चों को भोजन खिला रही है।
अपूर्ण सकर्मक क्रिया किसे कहते है

अपूर्ण सकर्मक क्रियाजिस सकर्मक क्रिया के साथ ‘कर्म’ के अतिरिक्त भी किसी न किसी पूरक शब्द की आवश्यकता बनी रहती है तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया को अपूर्ण सकर्मक क्रिया कहते हैं।

आसान भाषा में कहें तो अपूर्ण सकर्मक क्रिया में पूरक शब्दों के बिना काम का पूर्ण होना नहीं पाया जाता।

उदाहरण:- 

  1. नवीन सचिन को चतुर समझता है। इस वाक्य में ‘चतुर’ शब्द एक पूरक शब्द है। 

अकर्मक क्रिया किसे कहते हैं

Akarmak kriya Kise Kahte Hain
Akarmak kriya Kise Kahte Hain

अकर्मक क्रिया – वे क्रियाएँ, जिनका प्रभाव वाक्य में प्रयुक्त कर्ता पर पड़ता है, उन्हें अकर्मक क्रिया कहते हैं। अकर्मक शब्द ‘अ’ और ‘कर्मक’ से मिलकर बना है, जहाँ ‘अ’ उपसर्ग का अर्थ ‘बिना’ तथा ‘कर्मक’ का अर्थ ‘कर्म के’ होता है। अतः अकर्मक का अर्थ हुआ – ‘कर्म के बिना’। अकर्मक क्रिया के साथ कर्म प्रयुक्त नहीं होता है।

अकर्मक क्रिया के उदाहरण :-

  1. रमेश दौड़ रहा है। इस वाक्य में ‘दौड़ रहा है’ क्रियापद है। इस वाक्य में कर्म कारक उपस्थित नहीं है। अतः ‘दौड़ रहा है’ अकर्मक क्रिया है।
  2. मुकेश बैठा है। इस वाक्य में भी कर्म कारक उपस्थित नहीं है। अतः ‘बैठा है’ अकर्मक क्रिया है।
किसी वाक्य में अकर्मक क्रिया कैसे पहचाने

सबसे पहले आपको वाक्य में क्रिया पद से पहले ‘क्या’ लगाकर वाक्य को सवाल की तरह पढ़ना है। यदि उस वाक्य में अकर्मक क्रिया होगी तो, आपको वाक्य में प्रयुक्त ‘कर्म’ के रूप में जवाब नहीं मिलेगा।

यह भी पढ़ें:-

प्रयोग तथा संरचना के आधार पर क्रिया के भेद

  • सामान्य क्रिया
  • सहायक क्रिया
  • संयुक्त क्रिया
  • प्रेरणार्थक क्रिया
  • पूर्वकालिक क्रिया
  • सजातीय क्रिया
  • कृदंत क्रिया
  • नामधातु क्रिया

सामान्य क्रिया किसे कहते हैं

सामान्य क्रिया – यह क्रिया का सामान्य रूप होता है, जिसमें एक कार्य एवं एक ही क्रिया पद होता है। जब किसी वाक्य में एक ही क्रिया पद प्रयुक्त किया गया हो तो, उसे सामान्य क्रिया कहते हैं।

सामान्य क्रिया के उदाहरण:- 

  1. रवि पुस्तक पढ़ता है।
  2. श्याम आम खाता है।

सहायक क्रिया किसे कहते हैं

सहायक क्रिया – किसी वाक्य में मुख्य क्रिया की सहायता करने वाले पद को सहायक क्रिया कहते हैं, अर्थात किसी वाक्य में वह पद जो मुख्य क्रिया के साथ लगकर वाक्य को पूर्ण करता है, उसे सहायक क्रिया कहते हैं। सहायक क्रिया वाक्य के काल का परिचायक होती है।

सहायक क्रिया के उदाहरण:- 

  1. रवि पढ़ता है। इस वाक्य में ‘पढ़ता’ मुख्य क्रिया है। ‘है’ इस मुख्य क्रिया की सहायता करने वाला पद है।
  2. मैंने पुस्तक पढ़ ली है। इस वाक्य में ‘पढ़’ मुख्य क्रिया एवं ‘ली है’ सहायक क्रिया पद है, जो मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर वाक्य को पूरा कर रहा है।

संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं

संयुक्त क्रिया – वह क्रिया जो दो अलग-अलग क्रियाओं के योग से बनती है, उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं।

संयुक्त क्रिया के उदाहरण:- 

  1. रजनी ने खाना खा लिया। इस वाक्य में ‘खाना’ एवं ‘खा’ मिलकर एक क्रिया बना रहे हैं। अतः ‘खाना खा’ संयुक्त क्रिया होगी।
  2. मैंने पुस्तक पढ़ डाली है। इस वाक्य में ‘पढ़’ एवं ‘डाली’ मिलकर एक क्रिया बना रहे हैं। अतः पर ‘पढ़ डाली’ संयुक्त क्रिया होगी।

प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं

प्रेरणार्थक क्रिया – वे क्रियाएँ जिन्हें कर्ता स्वयं करने के बजाय किसी दूसरे को क्रिया करने के लिए प्रेरित करता है, उन्हें प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।

प्रेरणार्थक क्रिया के उदाहरण:- 

  1. रतन महेश से पत्र लिखवाता है। इस वाक्य में कर्ता रतन महेश से पत्र लिखवाता है। अतः इस वाक्य में ‘लिखवाता है’ प्रेरणार्थक क्रिया है।
  2. सविता कविता से कपड़े धुलवाती है। इस वाक्य में ‘सविता’ कपड़े धोने के लिए ‘कविता’ को प्रेरित कर रही है। अतः इस वाक्य में ‘धुलवाती है’ प्रेरणार्थक क्रिया है।

पूर्वकालिक क्रिया किसे कहते हैं

पूर्वकालिक क्रिया – यदि किसी वाक्य में दो क्रियाएँ एक साथ आई हों तथा उनमें से एक क्रिया पहले संपन्न हुई हो तो, पहले संपन्न हुई क्रिया को पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं। मूल धातु के साथ ‘कर’ प्रत्यय लगाने से पूर्वकालिक क्रिया बनती है।

पूर्वकालिक क्रिया के उदाहरण:- 

  1. विकास पढ़कर सो गया। इस वाक्य में ‘पढ़कर’ एवं ‘सो गया’ दो क्रियाएं एक साथ प्रयुक्त हुई, जिसमें से पढ़कर पहले संपन्न हुई है। अतः इस वाक्य में ‘पढ़कर’ पूर्वकालिक क्रिया है।

सजातीय क्रिया किसे कहते हैं

सजातीय क्रिया – क्रिया का वह रूप जिसमें कर्म तथा क्रिया दोनों एक ही धातु से बने हों तथा एक साथ प्रयुक्त हुए हों तो, उन्हें सजातीय क्रिया कहते हैं।

सजातीय क्रिया के उदाहरण:- 

  1. भारत ने लड़ाई लड़ी।

कृदंत क्रिया किसे कहते हैं

सजातीय क्रिया – वे क्रियाएं, जो क्रिया पदों के साथ प्रत्यय लगाने से बनती है, उन्हें कृदंत क्रिया कहते हैं।

कृदंत क्रिया के उदाहरण:- 

  1. चल धातु से = चलना, चलता, चलकर
  2. लिख धातु से = लिखना, लिखता, लिखकर

नामधातु क्रिया किसे कहते हैं

नामधातु क्रिया – आमतौर पर सभी क्रियाओं की रचना किसी न किसी धातु से होती है, लेकिन जब किसी क्रिया की रचना धातु से ना होकर संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से होती है तो, उस क्रिया को नामधातु क्रिया कहते हैं।

नामधातु क्रिया के उदाहरण:- 

  1. अपना (सर्वनाम) + ना = अपनाना
  2. चमक (संज्ञा) + ना = चमकना, चमकाना

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काल के आधार पर क्रिया के भेद

काल के आधार पर क्रिया के तीन भेद होते हैं। 

  • भूतकालिक क्रिया
  • वर्तमानकालिक क्रिया
  • भविष्यतकालिक क्रिया

भूतकालिक क्रिया किसे कहते हैं

भूतकालिक क्रिया – वे क्रियाएँ, जिनके द्वारा भूतकाल में कार्य के संपन्न होने का बोध होता है, उन्हें भूतकालिक क्रियाएँ कहते हैं।

भूतकालिक क्रिया के उदाहरण:- 

  1. विकास ने पुस्तक पढ़ ली थी।
  2. रमेश सुबह ही चला गया था।

भूतकालिक क्रिया के 6 भेद होते हैं।

सामान्य भूतकालिक क्रिया

सामान्य भूतकालिक क्रिया – क्रिया के जिस रूप से कार्य के बीते हुए समय में होने का बोध होता हो, लेकिन कार्य के पूर्ण होने का निश्चित समय का पता नहीं चलता हो तो, क्रिया के उस रूप को सामान्य भूतकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में या, यी, ये अथवा आ, ए, ई आया हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया सामान्य भूतकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. नवीन ने खाना खाया
  2. रमेश ने पानी पिया
  3. महेश ने चारपाई बनायी
  4. विक्की ने शराब पी(ई)
आसन्न भूतकालिक क्रिया

आसन्न भूतकालिक क्रिया – क्रिया के जिस रूप से कार्य के कुछ समय पूर्व ही समाप्त होने का बोध होता हो, उसे आसन्न भूतकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में चुका है, चुकी है, चुके हैं, चुका हूँ, चुकी हूँ अथवा या, ये, यी, आ, ए, ई के साथ में हैं, है प्रयुक्त किया गया हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया आसन्न भूतकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. नवीन खाना खा चुका है।
  2. रमेश ने पानी पिया है
  3. महेश ने चारपाई बना ली है
  4. बच्चे स्कूल गए हैं
  5. मैं नहा चुका हूँ।
  6. उसने फल तोड़ा है
पूर्ण भूतकालिक क्रिया

पूर्ण भूतकालिक क्रिया – क्रिया के जिस रूप से कार्य के बहुत समय पूर्व समाप्त होने का बोध होता हो, उसे पूर्ण भूतकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में चुका था, चुकी थी, चुके थे अथवा या, ये, यी, आ, ए, ई के साथ था, थे, थी लगा हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया पूर्ण भूतकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. नवीन खाना खा चुका था।
  2. रमेश ने पानी पी लिया था
  3. महेश ने चारपाई बना ली थी
  4. बच्चे स्कूल गए थे
  5. मैं नहा चुका था।
  6. उसने फल तोड़ा था।
संदिग्ध भूतकालिक क्रिया 

संदिग्ध भूतकालिक क्रिया – क्रिया के जिस रूप से कार्य के बीते हुए समय में होने पर संशय का बोध हो तो, क्रिया के उस रूप को संदिग्ध भूतकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में चुका होगा, चुकी होगी, चुके होंगे अथवा या, ये, यी, आ, ए, ई के साथ होगा, होगी, होंगे प्रयुक्त हुआ हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया संदिग्ध भूतकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. नवीन खाना खा चुका होगा।
  2. रमेश ने पानी पी लिया होगा।
  3. महेश ने चारपाई बना ली होगी।
  4. बच्चे स्कूल गए होंगे।
  5. उसने फल तोड़ा होगा।
  6. सीता सो चुकी होगी।
  7. वह जा चुके होंगे।
अपूर्ण भूतकालिक क्रिया

अपूर्ण भूतकालिक क्रिया – क्रिया के जिस रूप से कार्य का बीते हुए समय में जारी रहने का बोध होता हो, उसे अपूर्ण भूतकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में रहा था, रही थी, रहे थे करता था, करती थी, करते थे आ रहा हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया अपूर्ण भूतकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. नवीन खाना खा रहा था।
  2. सीता सो रही थी।
  3. वह बचपन में बहुत शरारत करता था।
  4. हम खेत में जाया करते थे।
हेतुहेतुमद् भूतकालिक क्रिया

हेतुहेतुमद् भूतकालिक क्रिया – भूतकालिक क्रिया का वह रूप जिसमें बीते हुए समय के साथ कोई शर्त प्रयुक्त हुई हो तो, क्रिया के उस रूप को हेतुहेतुमद् भूतकालिक क्रिया कहते हैं। इस तरह के वाक्यों में भुतकाल में होने वाली कोई क्रिया किसी अन्य क्रिया पर निर्भर होती है। 

उदाहरण:- 

  1. यदि हम पढ़ते तो सफल हो जाते।
  2. अगर मैं वहां होता तो ऐसा कभी ना होता।

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वर्तमानकालिक क्रिया किसे कहते हैं

वर्तमानकालिक क्रिया – वे क्रियाएँ, जिनके द्वारा वर्तमान में काम के संपन्न होने का बोध होता है, उन्हें वर्तमानकालिक क्रियाएँ कहते हैं।

वर्तमानकालिक क्रिया के 5 भेद होते हैं।

सामान्य वर्तमानकालिक क्रिया

सामान्य वर्तमानकालिक क्रिया – वर्तमानकालिक क्रिया का वह रूप जिससे कार्य का सामान्य रूप से वर्तमान समय में होने का बोध हो तो, क्रिया के उस रूप को सामान्य वर्तमानकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में ता है, ती है, ते हैं, ता हूँ, ती हूँ आया हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया सामान्य वर्तमानकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. रमेश खाना खाता है।
  2. रवि चाय बनाता है
  3. हम स्कूल जाते हैं।
  4. मैं प्रतिदिन व्यायाम करता हूँ।
अपूर्ण वर्तमानकालिक क्रिया

अपूर्ण वर्तमानकालिक क्रिया – वर्तमानकालिक क्रिया का वह रूप जिससे कार्य का वर्तमान समय में जारी रहने का बोध हो तो, क्रिया के उस रूप को अपूर्ण वर्तमानकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में रहा है, रही है, रहे हैं, रही हूँ, रहा हूँ  में से कोई सहायक क्रिया प्रयुक्त हुई हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया अपूर्ण वर्तमानकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. रमेश खाना खा रहा है।
  2. सीता चाय बना रही है।
  3. वह सभी स्कूल जा रहे हैं।
  4. मैं कपड़े धो रहा हूँ।
संदिग्ध वर्तमानकालिक क्रिया

संदिग्ध वर्तमानकालिक क्रिया – वर्तमानकालिक क्रिया का वह रूप जिससे कार्य के वर्तमान समय में होने पर संशय का बोध हो तो, क्रिया के उस रूप को संदिग्ध वर्तमानकालिक क्रिया कहते हैं। सामान्य वर्तमानकालिक क्रिया में संशय की स्थिति जोड़ने पर संदिग्ध वर्तमानकालिक क्रिया बन जाती है। यदि किसी वाक्य के अंत में रहा होगा, रही होगी, रहे होंगे में से कोई एक सहायक क्रिया के रूप में प्रयुक्त हुआ हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया संदिग्ध वर्तमानकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. रमेश खाना खा रहा होगा।
  2. सीता चाय बना रही होगी।
  3. सभी सो रहे होंगे।
आज्ञार्थक वर्तमानकालिक क्रिया

आज्ञार्थक वर्तमानकालिक क्रिया – वर्तमानकालिक क्रिया का वह रूप जिससे वर्तमान काल में आज्ञा या आदेश देने का बोध हो तो, क्रिया के उस रूप को आज्ञार्थक वर्तमानकालिक क्रिया कहते हैं।

उदाहरण:- 

  1. बैठ जाओ।
  2. सीता अब तुम चाय बनाओ।
  3. पत्र लिखो।
सम्भाव्य वर्तमानकालिक क्रिया

सम्भाव्य वर्तमानकालिक क्रिया – वर्तमानकालिक क्रिया का वह रूप जिससे वर्तमान समय में अपूर्ण क्रिया की संभावना या संशय होने का बोध होता हो तो, क्रिया के उस रूप को सम्भाव्य वर्तमानकालिक क्रिया कहते हैं। अपूर्ण वर्तमानकालिक क्रिया में संशय की स्थिति जोड़ देने पर वर्तमानकालिक क्रिया बनती है। यदि किसी वाक्य के अंत में सहायक क्रिया के रूप में रहा होगा, रही होगी, रहे होंगे, रहा हो, रही हो, रहे हो आदि में से किसी एक का प्रयोग किया गया हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया सम्भाव्य वर्तमानकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. शायद रवि आया हो।

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भविष्यतकालिक क्रिया किसे कहते हैं

भविष्यतकालिक क्रिया – वे क्रियाएं, जिनके द्वारा भविष्य में होने वाले काम का बोध होता हो, उन्हें भविष्यतकालिक क्रिया कहते हैं।

उदाहरण:- 

  1. वह कल जयपुर जाएगा।
  2. रमेश अगले सप्ताह घर आएगा।

भविष्यतकालिक क्रिया के तीन भेद होते हैं।

सामान्य भविष्यतकालिक क्रिया

सामान्य भविष्यतकालिक क्रिया – भविष्यकालिक क्रिया का वह रूप जिससे कार्य का सामान्य रूप से आने वाले समय में होने का बोध होता हो तो, क्रिया के उस रूप को सामान्य भविष्यकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में एगा, एगी, एंगे, उँगा, उँगी आदि सहायक क्रियाओं में से कोई एक क्रिया आई हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया सामान्य भविष्यकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. वह पुस्तक पड़ेगा।
  2. मैं घर जाऊंगा।
  3. हम हॉकी खेलेंगे।
आज्ञार्थक भविष्यतकालिक क्रिया

आज्ञार्थक भविष्यतकालिक क्रिया – भविष्यकालिक क्रिया का वह रूप जिससे भविष्य काल में आज्ञा या आदेश देने का बोध प्रकट होता हो तो, क्रिया के उस रूप को आज्ञार्थक भविष्यकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में ‘इएगा’ सहायता क्रिया के रूप में प्रयुक्त किया गया हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया आज्ञार्थक भविष्यतकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. आप अपनी पढ़ाई कीजिएगा।
  2. आप कल अवश्य आइएगा।
संभाव्य भविष्यतकालिक क्रिया

संभाव्य भविष्यतकालिक क्रिया – भविष्यकालिक क्रिया के जिस रूप से कार्य के भविष्य काल में होने की संभावना या संशय होने का बोध होता हो तो, क्रिया के उस रूप को संभाव्य भविष्यकालिक क्रिया कहते हैं। यदि किसी वाक्य के अंत में सकता है, सकती है, सकते हैं, सकता हूँ, सकती हूँ, चाहिए आदि आया हो तो, उस वाक्य में प्रयुक्त क्रिया संभाव्य भविष्यतकालिक क्रिया होगी।

उदाहरण:- 

  1. दो दिन बाद रमेश आ सकता है।
  2. अब मुझे क्या करना चाहिए।

आज की पोस्ट में हमने आपको क्रिया किसे कहते हैं , क्रिया की परिभाषा , क्रिया के उदाहरण एवं क्रिया के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई है। यह पोस्ट प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिखी है।

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