तत्पुरुष समास: परिभाषा, भेद और उदाहरण – Tatpurush Samas – Tatpurush Samas Kise Kahate Hain

tatpurush samas

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Tatpurush Samas

Tatpurush Samas

Tatpurush Samas in Hindi

Tatpurush Samas Ki Paribhasha – समास का वह रूप जिसमें द्वितीय पद या उत्तर पद प्रधान हो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। तत्पुरुष समास में प्रथम पद संज्ञा या विशेषण होता है और लिंग-वचन का निर्धारण अंतिम या द्वितीय पद के अनुसार होता है। तत्पुरुष समास में पूर्व पद एवं पर पद के मध्य कारक चिन्हों का लोप होता है और जब सामासिक पद का समास-विग्रह किया जाता है, तो कर्ता कारक एवं सम्बोधन कारक को छोड़कर शेष कारकों के कारक चिन्हों का प्रयोग किया जाता है।

जैसे: गंगा जल लाओ। इस वाक्य को सुनकर, सुनने वाला ‘गंगा’ को नहीं ला सकता, बल्कि केवल ‘जल’ लेकर आएगा। अतः गंगाजल सामासिक पद में प्रथम पद ‘गंगा’ प्रधान न होकर द्वितीय पद ‘जल’ प्रधान है, इसलिए यहाँ तत्पुरुष समास होगा।

तत्पुरुष समास के उदाहरण (Tatpurush Samas Ke Udaharan)

  • स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त
  • दिल तोड़ = दिल को तोड़ने वाला
  • शरणागत = शरण को आया हुआ
  • अकालपीड़ित = अकाल से पीड़ित
  • तुलसीकृत = तुलसीदास द्वारा किया हुआ
  • कष्टसाध्य = कष्ट से साध्य
  • देशभक्ति = देश के लिए भक्ति
  • घुड़साल = घोड़ों के लिए साल (भवन)
  • सभामंडप = सभा के लिए मंडप
  • गुणरहित = गुण से रहित
  • जन्मान्ध = जन्म से अन्धा
  • पापमुक्त = पाप से मुक्त
  • राजसभा = राजा की सभा
  • चर्मरोग = चर्म का रोग
  • जलधारा = जल की धारा
  • आत्मनिर्भर = स्वयं पर निर्भर
  • कविराज = कवियों में राजा
  • सिरदर्द = सिर में दर्द
  • आपबीती = अपने पर बीती हुई

तत्पुरुष समास के भेद (Tatpurush Samas ke Bhed)

मूल व्याकरण, संस्कृत व्याकरण, के अनुसार तत्पुरुष समास के दो भेद होते हैं- व्याधिकरण समास और समानाधिकरण समास।

  1. व्याधिकरण तत्पुरुष समास
  2. समानाधिकरण तत्पुरुष समास

व्याधिकरण तत्पुरुष समास (Vyadhikaran Tatpurush Samas)

तत्पुरुष समास का वह रूप जिसमें समास-विग्रह करते समय पुर्व एवं पर पद में भिन्न-भिन्न विभक्तियों का प्रयोग किया जाता है उसे व्याधिकरण तत्पुरुष समास कहते हैं। मुल तत्पुरुष समास ही व्याधिकरण तत्पुरुष समास होता है।

व्याधिकरण तत्पुरुष समास के भेद (Vyadhikaran Tatpurush Samas Ke Bhed)

व्याधिकरण समास में अलग-अलग कारक चिन्हों का लोप होता है, इसी आधार पर व्याधिकरण समास के छः भेद होते हैं। व्याधिकरण समास के सभी छ: भेद कारकों के अनुसार तय किए गए हैं, जिनमें कर्ता कारक और सम्बोधन कारक को शामिल नहीं किया गया है।

  1. कर्म तत्पुरुष समास – Karam Tatpurush
  2. करण तत्पुरुष समास – Karan Tatpurush
  3. सम्प्रदान तत्पुरुष समास – Sampradan Tatpurush
  4. अपादान तत्पुरुष समास – Apadan Tatpurush
  5. सम्बंध तत्पुरुष समास – Sambandh Tatpurush
  6. अधिकरण तत्पुरुष समास – Adhikaran Tatpurush

कर्म तत्पुरुष समास (Karam Tatpurush Samas)

जिस तत्पुरुष समास में कर्म कारक के कारक चिन्ह (को) का लोप हुआ हो उसे कर्म तत्पुरुष समास कहते हैं.

कर्म तत्पुरुष समास के उदाहरण (Karam Tatpurush Samas Ke Udaharan)
  • कृष्णार्पण = कृष्ण को अर्पण
  • नेत्र सुखद = नेत्रों को सुखद
  • वन-गमन = वन को गमन
  • चिड़ीमार = चिड़ी को मारने वाला
  • कठफोड़ा = काठ को फ़ोड़नेवाला
  • प्राप्तोदक = उदक को प्राप्त हुआ
  • हस्तगत = हस्त को गया हुआ
  • जेबकतरा = जेब को कतरने वाला
  • नरभक्षी = नरों का भोजन करने वाला
  • गगनचुम्बी = गगन को चूमने वाला

करण तत्पुरुष समास (Karan Tatpurush Samas)

जिस तत्पुरुष समास में करण कारक के कारक चिन्ह (से, के, द्वारा) का लोप हुआ हो उसे करण तत्पुरुष समास कहते हैं.

करण तत्पुरुष समास के उदाहरण (Karan Tatpurush Ke Udaharan)
  • पददलित = पद से दलित
  • रेखांकित = रेखा के द्वारा अंकित
  • शोकाकुल = शोक से आकुल
  • प्रकाशयुक्त = प्रकाश से युक्त
  • गुणयुक्त = गुण से युक्त
  • जलावृत = जल से आवृत (घिरा हुआ)
  • ईश्वर-प्रदत्त = ईश्वर से प्रदत्त
  • मदमाता = मद से मत्त हुआ
  • मनमाना = मन से माना हुआ
  • रत्न जड़ित = रत्नों से जड़ित

सम्प्रदान तत्पुरुष समास (Sampradan Tatpurush Samas)

जिस तत्पुरुष समास में सम्प्रदान कारक के कारक चिन्ह (के लिए) का लोप हुआ हो उसे सम्प्रदान तत्पुरुष समास कहते हैं.

सम्प्रदान तत्पुरुष समास के उदाहरण (Sampradan Tatpurush Samas Ke Udaharan)
  • गुरुदक्षिणा = गुरु के लिए दक्षिणा
  • बलि-पशु = बलि के लिए पशु
  • रसोईघर = रसोई के लिए घर
  • गोशाला = गायों के लिए शाला
  • देवालय = देवता के लिए आलय
  • रणभूमि = रण के लिए भूमि
  • धर्मशाला = धर्म के लिए शाला
  • बालामृत = बालकों के लिए अमृत
  • यज्ञवेदी = यज्ञ के लिए वेदी
  • विद्यालय = विद्या के लिए आलय

अपादान तत्पुरुष समास (Apadan Tatpurush Samas)

जिस तत्पुरुष समास में अपादान कारक के कारक चिन्ह (से अलग होने के अर्थ में) का लोप हुआ हो उसे अपादान तत्पुरुष समास कहते हैं.

अपादान तत्पुरुष समास के उदाहरण (Apadan Tatpurush Samas Ke Udaharan)
  • लोकोत्तर = लोक से उत्तर
  • ऋणमुक्त = ऋण से मुक्त
  • दोषमुक्त = दोष से मुक्त
  • जलजात = जल से जात
  • देशनिकाला = देश से निकाला हुआ
  • जातिभ्रष्ट = जाति से भ्रष्ट
  • सेवानिवृत्त = सेवा से निवृत्त
  • धर्मविमुख = धर्म से विमुख
  • बन्धनमुक्त = बन्धन से मुक्त
  • आशातीत = आशा से अतीत
  • जलरिक्त = जल से रिक्त

सम्बंध तत्पुरुष समास (Sambandh Tatpurush)

जिस तत्पुरुष समास में सम्बंध कारक के कारक चिन्ह (का, के, की) का लोप हुआ हो उसे सम्बंध तत्पुरुष समास कहते हैं.

सम्बंध तत्पुरुष समास के उदाहरण (Sambandh Tatpurush Samas Ke Udahran)
  • मंत्रिपरिषद = मंत्रियों की परिषद
  • देशवासी = देश का वासी
  • राष्ट्रपति = राष्ट्र का पति
  • सेनापति = सेना का पति
  • मतदाता = मत का दाता
  • नगरसेठ = नगर का सेठ
  • सेनाध्यक्ष = सेना का अध्यक्ष
  • फलाहार = फल का आहार
  • प्रेम-सागर = प्रेम का सागर
  • राजमाता = राजा की माता


अधिकरण तत्पुरुष समास (Adhikaran Tatpurush)

जिस तत्पुरुष समास में अधिकरण कारक के कारक चिन्ह (में, पर) का लोप हुआ हो उसे अधिकरण तत्पुरुष समास कहते हैं.

अधिकरण तत्पुरुष समास के उदाहरण (Adhikaran Tatpurush Samas Ke Udaharana)
  • वनवास = वन में वास
  • जीवदया = जीवों पर दया
  • ध्यान-मग्न = ध्यान में मग्न
  • घुड़सवार = घोड़े पर सवार
  • हरफ़नमौला = हर फ़न में मौला
  • नराधम = नरों में अधम
  • डिब्बाबन्द = डिब्बे में बन्द
  • फलासक्त = फल में सक्त
  • जल-मग्न = जल में मग्न
  • घृतान्न = घी में पका अन्न

समानाधिकरण तत्पुरुष समास (Samanadhikaran Tatpurush Samas)

तत्पुरुष समास का वह रूप जिसका समास-विग्रह करते समय पुर्व एवं पर पद में एक ही विभक्ति (कर्ता कारक) का प्रयोग किया जाता है उसे समानाधिकरण तत्पुरुष समास कहते हैं।

समानाधिकरण तत्पुरुष समास के भेद (Samanadhikaran Tatpurush Samas Ke Bhed)

समानाधिकरण तत्पुरुष समास के छः भेद होते हैं.

  1. लुप्तपद तत्पुरुष समास
  2. उपपद तत्पुरुष समास
  3. अलुक् तत्पुरुष समास
  4. नञ् तत्पुरुष समास
  5. कर्मधारय तत्पुरुष समास
  6. द्विगु तत्पुरुष समास

लुप्तपद तत्पुरुष समास (LuptPad Tatpurush Samas)

तत्पुरुष समास का वह रूप जिसमें पूर्व पद और द्वितीय पद के बीच से कारक चिन्ह के साथ-साथ अन्य पदों का भी लोप हो जाए तो उसे लुप्तपद तत्पुरुष समास कहते हैं। लुप्तपद तत्पुरुष समास को मध्यम पद लोपी तत्पुरुष समास भी कहते हैं।

लुप्तपद तत्पुरुष समास के उदाहरण (LuptPad Tatpurush Samas Ke Udaharana)
  • तुलादान = तुला से बराबर करके दिया जाने वाला दान
  • दहीबड़ा = दही में डूबा हुआ बड़ा
  • बैलगाड़ी = बैल से चलने वाली गाड़ी
  • पवनचक्की = पवन से चलने वाली चक्की
  • मालगाड़ी = माल को ढोने वाली गाड़ी
  • रेलगाड़ी = रेल पर चलने वाली गाड़ी
  • वनमानुष = वन में रहने वाला मानुष
  • स्वर्णहार = स्वर्ण से बना हार
  • पकौड़ी = पकी हुई बड़ी
  • मधुमक्खि = मधु को एकत्र करने वाली मक्खी

उपपद तत्पुरुष समास (Uppad Tatpurush Samas)

तत्पुरुष समास का वह रूप जिसमें द्वितीय पद भाषा में स्वतंत्र शब्द न होकर महज़ प्रत्यय के रूप में प्रयुक्त होता हो तो उसे उपपद तत्पुरुष समास कहते हैं।उपपद तत्पुरुष समास का विग्रह करते समय प्रत्यय का अर्थ काम में लिया जाता है।

उपपद तत्पुरुष समास के उदाहरण (Uppad Tatpurush Samas Ke Udahran)
  • चर्मकार = चर्म का कार (कार्य) करने वाला
  • स्वर्णकार = स्वर्ण का कार करने वाला
  • लाभप्रद = लाभ प्रदान करने वाला
  • जलद = जल देने वाला
  • उत्तरदायी = उत्तर देने वाला
  • दु:खदायी = दुःख देने वाला
  • मर्मज्ञ = मर्म को जानने वाला
  • सर्वज्ञ = सर्व को जानने वाला
  • पंकज = पंक में जन्म लेने वाला

अलुक् तत्पुरुष समास (Aluk Tatpurush Samas)

जिस तत्पुरुष समास में कारक चिन्ह का लोप नहीं होता उसे अलुक् तत्पुरुष समास कहते हैं। अलुक् तत्पुरुष समास में कारक चिन्ह किसी न किसी रूप में विद्यमान रहता है। अलुक् शब्द अ + लुक् के योग से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘न छिपना’ होता है।

दरअसल, तत्पुरुष समास की प्रक्रिया में किसी न किसी कारक चिन्ह का लोप होता है, लेकिन जब समास प्रक्रिया में कारक विभक्ति का लोप नहीं हो तो उसे अलुक् तत्पुरुष समास कहते हैं।

अलुक् तत्पुरुष समास के उदाहरण (Aluk Tatpurush Samas Ke Udaharan)
  • वसुंधरा = वसु को धारण करने वाली
  • मृत्युंजय = मृत्यु को जय करने वाला
  • वनेचर = वन में विचरण करने वाला
  • खेचर = आकाश में विचरण करने वाला
  • युधिष्ठिर = युद्ध में स्थिर रहने वाला

नञ् तत्पुरुष समास (Nay Tatpurush Samas)

जब किसी सामासिक पद में प्रथम पद के रूप में अ / अन् / अन / न / ना उपसर्ग जुड़े हुए हों और ये उपसर्ग पर पद को विलोम शब्द में भी परिवर्तित कर रहे हों तो वहाँ नञ् तत्पुरुष समास होता है. नञ् तत्पुरुष समास के सामासिक पद का विग्रह करते समय उपसर्ग को हटाकर ‘न’ जोड़ दिया जाता है.

नञ् तत्पुरुष समास के उदाहरण (Nay Tatpurush Samas Ke Udaharan)
  • अज्ञान = न ज्ञान
  • अनुपयोगी = न उपयोगी
  • अनहोनी = न होनी
  • नास्तिक = न आस्तिक
  • नालायक = न लायक
  • अविवेक = न विवेक
  • अनजान = न जान

Note: तत्पुरुष समास के दो अन्य भेद- कर्मधारय समास एवं द्विगु समास के बारे में जानने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

  1. कर्मधारय समास परिभाषा एवं उदाहरण
  2. द्विगु समास परिभाषा एवं उदाहरण

Samas Quiz – समास क्विज़

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