कर्मधारय समास: परिभाषा, भेद और उदाहरण

Karmadharaya Samas

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Karmadharaya Samas

Karmadharaya Samas in Hindi

Karmadharaya Samas Ki Paribhasha – जिस समास में प्रथम पद विशेषण या उपमान होता है तथा द्वितीय पद विशेष्य या उपमेय होता है, अर्थात विशेषणविशेष्य तथा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध रहता है उसे कर्मधारय समास कहते हैं. कर्मधारय समास में द्वितीय पद के अर्थ की प्रधानता होती है इसलिेए कर्मधारय समास को तत्पुरुष समास का भेद माना जाता है। इस समास को स्वतंत्र कर्मधारय समास के रूप में भी माना जाता है, परन्तु यह सही नहीं है।

कर्मधारय समास में प्रथम पद विशेषण या उपमान होता है तथा द्वितीय पद विशेष्य या उपमेय होता है। किसी सामासिक पद में शब्द आगे-पीछे होते रहते हैं परन्तु उनमें विशेषणविशेष्य तथा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध सदैव रहता है।

कर्मधारय समास (karmdharay samas) में प्रयुक्त विशेषण, असंख्यावाचक विशेषण (गुणवाचक विशेषण और परिमाणवाचक विशेषण) होता है, जिसका योग विशेष्य के साथ होता है.

यदि किसी सामासिक पद में निम्नलिखित चार स्थितियों में से कोई स्थिति बन रही हो तो वहाँ कर्मधारय समास होता हैं.

  1. विशेषणविशेष्य से युक्त पद होने पर
  2. उपमेय-उपमान से युक्त पद होने पर
  3. रूपक आलंकारिक से युक्त पद होने पर
  4. उपसर्ग से युक्त पद होने पर

विशेषणविशेष्य से युक्त पद होने पर

यदि किसी समस्त पद में विशेषणविशेष्य का योग हो रहा हो, तो ऐसे सामासिक पद का समास-विग्रह करते समय विशेषण और विशेष्य के मध्य ‘है / हैं + जो’ लगा दिया जाता है.

उदहारण

  • अल्पसंख्यक = अल्प है जो संख्या में
  • महेश्वर = महान है जो ईश्वर
  • पमेश्वर = परम है जो ईश्वर
  • महानवमी = महति है जो नवमी
  • अधभरा =आधा है जो भरा

उपमेय-उपमान से युक्त पद होने पर

यदि किसी समस्त पद में उपमान-उपमेय का योग हो रहा हो, तो ऐसे सामासिक पद का समास-विग्रह करते समय उपमान और उपमेय के मध्य ‘के समान + है / हैं + जो’ लगा दिया जाता है.

उदाहरण

  • कुसुमकोमल = कुसुम के समान है जो कोमल
  • वज्रकठोर = वज्र के समान है जो कठोर
  • हस्तकमल = कमल के समान है जो कमल
  • मीनाक्षी = मीन के समान है जो अक्षि
  • मुखकमल = कमल के समान है जो मुख

रूपक आलंकारिक से युक्त पद होने पर

  • शोकसागर = सागर रूपी शोक / सागर के समान है जो शोक
  • क्रोधाग्नि = अग्नि रूपी शोक / अग्नि के समान है जो क्रोध
  • वेदसंपत्ति = वेद रूपी सम्पत्ति
  • ताराघट = तारा रूपी घाट
  • विद्याधन = विद्या रूपी धन

उपसर्ग से युक्त पद होने पर

यदि किसी उपसर्ग को विशेषण की तरह प्रयुक्त किया गया हो तो वहाँ भी कर्मधारय समास होगा। उपसर्ग का महत्व अव्ययीभाव समास, तत्पुरुष समास और बहुव्रीहि समास में भी होता है, इसलिए यहाँ ध्यान रखने वाली बात यह है की कर्मधारय समास में उपसर्ग का प्रयोग विशेषण की तरह होता है, न की अव्यय की तरह.

उदाहरण के लिए:

  • कुपुत्र = कुत्सित है जो पुत्र
  • कुमार्ग = कुत्सित है जो मार्ग
  • कदाचार = कुत्सित है जो आचार
  • कदन्न = कुत्सित है जो अन्न
  • कापुरुष = कुत्सित है जो पुरुष
  • सुपुत्र = सुष्ठु है जो पुत्र
  • सत्परामर्श = सही है जो परामर्श

कर्मधारय समास के उदाहरण (Karmadharaya Samas Ke Udaharan)

  • कृष्णसर्प = कृष्ण है हो सर्प
  • श्वेतपत्र = श्वेत है जो पत्र
  • महाराजा = महान है जो राजा
  • अधमरा = जो आधा मरा हुआ है
  • श्यामसुन्दर = श्याम जो सुन्दर है
  • अन्धविश्वास = अन्धा विश्वास
  • चरणकमल = कमल के समान चरण
  • मुखारविन्द = अरविन्द के समान है जो मुख
  • नृसिंह = सिंह के समान है जो नर
  • घनश्याम = घन के समान है जो श्याम
  • उषानगरी = उषा रूपी नगरी
  • मनमंदिर = मन रूपी मंदिर

Note: यदि विशेषण पदों का दोहरान या पुनरावृत्ति हो तो वहाँ कर्मधारय समास ही होगा। जैसे: लाल-लाल, काला-काला, सफ़ेद-झक्क, नीला-भक्क इत्यादि।

कर्मधारय समास और द्विगु समास में अन्तर (Karmadharaya Samas or Samas Main Anter)

क्र.कर्मधारय समास द्विगु समास
01.कर्मधारय समास में असंख्यावचक विशेषण प्रयुक्त होता है.द्विगु समास में संख्यावाचक विशेषण प्रयुक्त होता है.
02.प्रथम पद संख्यावाची नहीं होता है.द्विगु समास में प्रथम पद संख्यावाची होता है.
03.समस्त पद समूह का बोध नहीं करवाता है.द्विगु समास में समस्त पद समूह का बोध करवाता है.

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